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चांद प्रखंड के नाराज़ किसानों ने भारत माला परियोजना निर्माण कार्य रोका

मुआवजा नहीं मिलने से नाराज़ किसानों ने भारतमाला परियोजना का निर्माण कार्य रोका

चांद प्रखंड के नाराज़ किसानों ने भारत माला परियोजना निर्माण कार्य रोका

मुआवजा नहीं मिलने से नाराज़ किसानों ने भारतमाला परियोजना का निर्माण कार्य रोका

 

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कैमूर जिला के चांद प्रखंड के नाराज़ किसानों ने भारत माला परियोजना निर्माण कार्य रोका मुआवजा भुगतान में हो रही देरी से नाराज़ खैंटी सिहोरिया गांव के किसानों ने बुधवार को भारत माला परियोजना के तहत बन रहे बनारस–रांची–कोलकाता एक्सप्रेस-वे के निर्माण कार्य को ठप कर दिया। दोपहर बाद सैकड़ों किसान “मुआवजा नहीं तो एक्सप्रेस-वे नहीं”, “किसान एकता जिंदाबाद” और “जय जवान, जय किसान” के नारे लगाते हुए खैंटी गांव पहुंचे और कार्य स्थल पर निर्माण रोक दिया।

किसानों का नेतृत्व कर रहे भारतीय किसान मजदूर यूनियन कैमूर के जिलाध्यक्ष अभिमन्यु सिंह ने कहा कि जब तक किसानों को उनका पूरा मुआवजा नहीं मिल जाता, तब तक भारतमाला परियोजना का काम शुरू नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि किसान पिछले चार महीनों से जिला भू-अर्जन विभाग के चक्कर काट रहे हैं। सभी आवश्यक कागजात जमा किए जाने के बावजूद मुआवजा भुगतान नहीं किया जा रहा है, जिससे किसानों में गहरा आक्रोश है।

अभिमन्यु सिंह ने स्पष्ट किया कि मुआवजा भुगतान के साथ-साथ प्रभावित इलाकों में सर्विस रोड निर्माण का ठोस आश्वासन मिलने के बाद ही परियोजना को आगे बढ़ने दिया जाएगा। किसानों द्वारा परियोजना रोके जाने की सूचना मिलते ही राजस्व अधिकारी मौके पर पहुंचे और किसानों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन किसान अपनी मांगों पर अड़े रहे किसानों का कहना है कि वे बार-बार जिला भू-अर्जन अधिकारी और जिलाधिकारी से मिलकर भुगतान में तेजी लाने की मांग कर चुके हैं, लेकिन प्रशासन की अनदेखी के कारण अब आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है। ग्रामीणों में यह चर्चा भी तेज है कि यदि मुआवजा भुगतान में यही लापरवाही जारी रही तो अन्य गांवों में भी भारतमाला परियोजना के कार्य को रोका जा सकता है। इससे बड़े किसान आंदोलन की आशंका जताई जा रही है खैंटी गांव के किसान विजय कुमार प्रजापति, लल्लन शर्मा, विकास यादव, नथुनी प्रजापति, जितेंद्र यादव और बहादुर बिंद सहित अन्य किसानों ने मांग की कि परियोजना को सुचारू रूप से पूरा किया जाए और किसानों को समय पर मुआवजा दिया जाए। किसानों ने यह भी कहा कि कैमूर जिले में प्रशासनिक स्थिरता के लिए जिलाधिकारी की भूमिका अहम है और मुआवजा भुगतान में ठोस पहल होनी चाहिए गौरतलब है कि बनारस–रांची–कोलकाता एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए कैमूर जिला में कुल 93 मौजा की 1700 एकड़ से अधिक भूमि का अधिग्रहण किया गया है। मुआवजे को लेकर किसान और प्रशासन पिछले तीन वर्षों से आमने-सामने हैं। बताया जाता है कि पूर्व में तत्कालीन जिलाधिकारी के प्रयास से किसानों और प्रशासन के बीच सहमति बनाकर परियोजना की शुरुआत कराई गई थी, लेकिन मुआवजा भुगतान में देरी के चलते एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है।

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